उत्तरकाशी के बँगाण (Bangan) क्षेत्र में सेब की खेती वहाँ की ऊँचाई, ठंडी जलवायु और उपयुक्त मिट्टी के कारण सफल होती है। यह क्षेत्र 1800–2500 मीटर ऊँचाई पर स्थित है, जहाँ सर्दियों में बर्फ पड़ती है और आवश्यक 800–1200 चिलिंग आवर पूरे होते हैं, जो सेब के लिए बहुत ज़रूरी हैं। यहाँ गहरी, दोमट और अच्छे जल-निकास वाली ढलानदार भूमि सेब के बाग के लिए उपयुक्त मानी जाती है। बँगाण क्षेत्र में Red Delicious, Royal Delicious, Golden Delicious, Rich-a-Red, Gala जैसी किस्में सफल हैं। चूँकि सेब में स्व-परागण नहीं होता, इसलिए हर 3–4 मुख्य पेड़ों के बीच 1 परागण किस्म (जैसे Golden Delicious या Granny Smith) लगाना आवश्यक होता है। 👉 इस प्रकार, सही जलवायु, भूमि चयन और उपयुक्त किस्मों के आधार पर बँगाण क्षेत्र में सेब की खेती तकनीकी रूप से सफल और किसानों की आजीविका की रीढ़ बनी हुई है।
(क) रोपण का समय
- दिसंबर–फरवरी (पत्तियाँ गिरने के बाद)
- बर्फ न हो, जमीन नरम हो
सेब के पौधों की कटाई-छँटाई (Pruning & Training) इसलिए की जाती है ताकि पौधा स्वस्थ, संतुलित और अधिक फल देने वाला बन सके। आसान भाषा में कारण नीचे दिए हैं👇
🌱 1. पौधे को सही आकार देने के लिए (Training)
- पौधे को बचपन से सही दिशा में बढ़ाया जाता है
- मजबूत तना और संतुलित शाखाएँ बनती हैं
- तेज हवा, बर्फ और भार से पौधा टूटता नहीं
✂️ 2. अधिक और अच्छा फल पाने के लिए
- अनावश्यक टहनियाँ हटाने से ऊर्जा सही जगह जाती है
- फल आकार में बड़े, रंग में अच्छे और स्वाद में मीठे होते हैं
- हर साल नियमित उत्पादन होता है
☀️ 3. धूप और हवा के बेहतर संचार के लिए
- पेड़ के अंदर तक धूप पहुँचती है
- नमी कम रहती है, जिससे फफूंद व रोग घटते हैं
🦠 4. रोग और कीट नियंत्रण के लिए
- सूखी, बीमार और टूटी शाखाएँ हट जाती हैं
- कीट-रोग फैलने की संभावना कम होती है
🌿 5. नए फलदार डंठल बनाने के लिए
- सेब पुराने नहीं बल्कि नए डंठलों पर अधिक फल देता है
- कटाई-छँटाई से नई, स्वस्थ शाखाएँ निकलती हैं
🧑🌾 6. बाग प्रबंधन आसान होता है
- स्प्रे, छिड़काव और तुड़ाई करना सरल
- पेड़ की ऊँचाई नियंत्रित रहती है
📅 कटाई-छँटाई का सही समय
- ❄️ सर्दियों में (दिसंबर–जनवरी) – मुख्य कटाई
🌸 गर्मियों में – हल्की सुधारात्मक कटाई
उत्तरकाशी के बँगाण (Bangan) क्षेत्र में सेब के फलों को निकालने (तुड़ाई) की प्रक्रिया परंपरागत अनुभव + आधुनिक सावधानी के साथ की जाती है। नीचे इसे स्थानीय तरीके से, आसान भाषा में समझाया गया है 👇
🍎 बँगाण क्षेत्र में सेब तुड़ाई की प्रक्रिया
⏰ 1. सही समय की पहचान
कब: अगस्त के अंत से सितंबर तक (किस्म व ऊँचाई पर निर्भर)
कैसे पहचानते हैं?
- सेब का रंग हरा से लाल/पीला होने लगे
- बीज भूरे हो जाएँ
- सेब हल्का घुमाने पर डंठल से आसानी से अलग हो जाए
👉 क्यों ज़रूरी है?
जल्दी तोड़ने से सेब फीका रहता है, देर से तोड़ने पर गिरकर खराब हो जाता है।
🧑🌾 2. हाथ से तुड़ाई (Manual Picking)
- बँगाण में आज भी ज़्यादातर हाथ से ही सेब तोड़े जाते हैं
- एक हाथ से सेब को हल्का घुमाकर ऊपर की ओर उठाया जाता है
- डंठल सहित फल निकाला जाता है
👉 क्यों?
डंठल रहने से फल लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
🪜 3. सीढ़ी या पेड़ पर चढ़कर तुड़ाई
- पहाड़ी ढलानों पर छोटे पेड़ होने से
- लकड़ी/लोहे की सीढ़ी
- या सावधानी से पेड़ पर चढ़कर
तुड़ाई की जाती है
👉 क्यों?
ऊँचाई वाले फलों तक पहुँचने के लिए।
🧺 4. टोकरियों और कैरेट में संग्रह
- तुड़े हुए सेब बांस की टोकरी या प्लास्टिक कैरेट में रखे जाते हैं
- नीचे घास या कपड़ा बिछाया जाता है
👉 क्यों?
चोट लगने से सेब जल्दी सड़ता है।
🍏 5. छँटाई (Grading)
बँगाण क्षेत्र में किसान सेब को 3 भागों में बाँटते हैं:
- अच्छे आकार और रंग वाले – बाजार/मंडी
- मध्यम – स्थानीय बिक्री
- छोटे/दागदार – घरेलू उपयोग या जूस
👉 क्यों?
अच्छी ग्रेड = अच्छा दाम 💰
🚚 6. पैकिंग और ढुलाई
- सेब को कार्टन या लकड़ी के बॉक्स में पैक किया जाता है
- नीचे कागज/घास लगाई जाती है
- फिर ट्रक/पिकअप से देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार भेजा जाता है
🌄 बँगाण क्षेत्र की खास बातें
- ठंडी जलवायु से सेब में अच्छा रंग और मिठास
- छोटे परिवारों द्वारा सामूहिक तुड़ाई
- सेब की खेती यहाँ की रीढ़ की हड्डी है
🍎 तोड़े गए सेबों को मंडी तक पहुँचाना
- तुड़ाई: सेब सुबह/शाम डंठल सहित सावधानी से तोड़े जाते हैं।
- छंटाई: खेत या घर पर A, B, C ग्रेड में अलग किए जाते हैं।
- पैकिंग: लकड़ी की पेटी या कार्डबोर्ड बॉक्स में सुरक्षित पैक किया जाता है।
- ढुलाई (खेत से सड़क): पीठ, खच्चर या रोपवे से सेब सड़क तक लाए जाते हैं।
- परिवहन (सड़क से मंडी): पिकअप/ट्रक से हर्षिल, उत्तरकाशी या बाहरी मंडियों तक भेजे जाते हैं।
- मंडी प्रक्रिया: आढ़ती के माध्यम से बोली, तौल और बिक्री होती है।